Thursday, 22 September 2016

विश्वभर की जीएसटी दरें व भारत से हम क्या अपेक्षा कर सकते हैं

जीएसटी बिल के पारित होने को कठिन कर रही बहसों में से एक कर की दरे हैं। आमतौर पर कर सुधार का अर्थ है कि उपभोक्ता को सुधार से लाभ मिलेगा। और इसलिए एक आम आदमी अपेक्षा करता है कि जीएसटी अधिनियमित हो जाने के बाद वह काफी सारा पैसा बचाने में सक्षम हो पाएगा। संसद में बिल, जो कि मूल रूप से 2000 में वाजपेयी सरकार के द्वारा प्रस्तावित किया गया था, के पारित होने के बारे में प्रचार इतना अधिक है कि 2000 से लेकर अब तक प्रत्येक सरकार उसके कार्यकाल के दौरान इस बिल को पारित करना चाहती रही है। चाहे वह भाजपा शासित सरकार रही हो अथवा कांग्रेस की, मूल रूप से दोनो सहमत हैं कि भारत को जीएसटी की आवश्यकता है। हालांकि वर्तमान में विवाद दरों, कार्यान्वन, व विवाद समाधान के संबंध में है।

उन दरों के विषय में बात करतें हैं जिनपर भारत के पास जीएसटी होना चाहिए। कई विशेषज्ञों का मानना है कि 27 % की राजस्व तटस्थ दर मुद्रास्फीति में वृद्धि करेगी। कुछ का मानना है कि अरूण जेटली द्वारा प्रस्तावित 18 % की नवीनतम दर राज्य के कर राजस्व को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी। इसलिए हम विश्वभर से इसकी तुलना करतें हैं एवं उनकी आयकर दरों पर भी विचार करते हैं।


जीएसटी %
आयकर (उच्चतम)
आस्ट्रेलिया
10 %
49 %
फ्रांस
19-6 %
45 %
केनेडा
5 %
50 %
जर्मनी
19 %
45 %
जापान
8 %
50 %
सिंगापुर
7 %
20 %
स्वीडन
25 %
59 %
भारत Û
18 %
35 %
न्यूजीलैंड
15 %
33 %
पाकिस्तान
18 %
35 %
मलेशिया
6 %
26 %
डेनमार्क
25 %
61 %
संयुक्त राज्य
12 %
40 %
बेल्जियम
21 %
64 %
हंगरी
27 %
16 %
*प्रस्तावित (हाईलाइटेड दरें विश्व में उच्चतम है)

ऊपर जो कर दरें हम देख रहे हैं वे बताती हैं कि भारत विश्व में उच्चतम कर वाले राष्ट्रों में से एक नहीं है। उसका कारण यह है कि हमारी एक विशाल समानांतर अर्थव्यवस्था है जिसपर कर लगाया ही नहीं गया है। वे राष्ट्र जिनके कर भारत से अधिक हैं उनकी जनसंख्या आमतौर पर भौगोलिक तौर पर बहुत कम है, और ‘‘सफेद अर्थव्यवस्था’’ वाले हैं। राजस्व रसाव नगण्य हैं और करों की उपेक्षा करने की स्थिति में जोखिम नहीं है।

हालांकि भारत में यह सत्य नहीं है। हमारे यहां बहुत भ्रष्टाचार है और हमारे कर का आधार संकीर्ण है। आयकर निर्धारिती की कुल संख्या 6 करोड़ (हमारी जनसंख्या का 5 प्रतिशत)। इसलिए सिंगापुर एवं मलेशिया की एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तरह हमें भी बहुत कम दर पर जीएसटी लागू करने की और उसके बाद दरों में बढ़ोतरी द्वारा राजस्व की अपेक्षा करने के बजाय कर आधार को विस्तृत करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। 

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