Thursday, 16 February 2017

भारत को आर्थिक विकास के लिए जीडीपी का इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं है।

आर्थिक विकास का अर्थ है देश की आय में बढ़ोतरी। जीडीपी में 7 प्रतिशत बढ़त का अर्थ होगा कि जिस व्यक्ति की आय पिछले वर्ष 100 रूपये थी, वह इस वर्ष 107 रूपये कमाएगा। भारत प्रति व्यक्ति आय के क्रम में 228 देशों में 168 वें स्थान पर है जो सबसे कम में से एक है। यह बुरा है - उदाहरण के लिए फीजी - उसी सूची में 161वें स्थान पर है। केवल एक लंबी अवधि का स्थिर आर्थिक विकास ही भारत को जीडीपी सुधारने में एवं चीन तक पहुंचने में सहायता कर सकता है, जो उतना ही बड़ा देश है परंतु फिर भी 121वें स्थान पर दुगने प्रति व्यक्ति जीडीपी के साथ है।

दूसरी तरफ आर्थिक विकास जीवनयापन की वह गुणवत्ता है जो देश उसके नागरिकों को प्रदान करता है। इसे मापना आमतौर पर आर्थिक विकास मापने जितना आसान नहीं होता। ऐसे कई कारक हैं जो आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं - जिसमें शामिल हैः केलोरी ग्रहण, शिशु मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर, श्रमिकों की व्यावसायिक संरचना एवं शहरीकरण।

विश्वभर में, वे देश जिन्होंने आर्थिक विकास प्राप्त किया है, वे हैं जिन्होंने पहले एक स्तर तक आर्थिक बढ़त प्राप्त की है एवं फिर उन्होंने विकसित होना प्रारंभ किया है। हालांकि भारत एक बहुत कम प्रति व्यक्ति आय पर आर्थिक विकास का अनुभव कर रहा है।

मैं कुछ उदाहरणों द्वारा समझाता हूँ। भारत में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जन्म 40 मृत्यु के लगभग है। हालांकि वर्तमान में संयुक्त राज्य में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जन्म 6 मृत्यु है। प्रथम दृष्टि में ऐसा लगता है कि भारत की स्थिति संयुक्त राज्य से 6 गुना बुरी है। हालांकि जब संयुक्त राज्य में प्रति 1000 जन्म 40 मृत्यु थी तब उनकी प्रति व्यक्ति आय भारत की वर्तमान से लगभग 3 गुना थी। उच्च आय का अर्थ है बेहतर स्वास्थ्य देखभाल एवं कम शिशु मृत्यु दर। भारत उसी स्तर की शिशु मृत्यु दर प्राप्त कर सकता है संयुक्त राज्य की एक तिहाई प्रति व्यक्ति आय पर।

बजट में वहन करने योग्य आवास का हाल ही के विस्तार से शहरीकरण को एक बड़ी बढ़त मिलने वाली है। अभी तक केवल 30 प्रतिशत भारत ही शहरों में रहता है - 70 प्रतिशत गावों में रहता है। ग्रामीण निर्धनों को शहरों में लाने के लिए घरों की आवश्यकता है। कई सरकारें वहन करने योग्य आवासों के बारे में बात करती रही हैं एवं इसका अर्थ होगा कि घर खरीदने वालों को शहरों में घर खरीदने के लिए इतना धनी होने की आवश्यकता नहीं है - जितनी आवश्यकता अन्य देशों में है।

भारत में साक्षरता दर निराशाजनक ढंग से कम है - 75 प्रतिशत से कम जबकि चीन 96 प्रतिशत का दावा करता है। हालांकि यहां पर भी पेचीदगी है। भारत के युवा 90 प्रतिशत साक्षर हैं -इसका अर्थ है कि अधिकांश कार्यरत जनसंख्या साक्षर होगी।

देश की व्यावसायिक संरचना एक अविकसित अर्थव्यवस्था में आमतौर पर कृषि है। एक विकासशील अर्थव्यवस्था में नौकरियों का अधिकांश भाग निर्माण में है। और एक पूर्ण विकसित अर्थव्यवस्था में जीडीपी का बड़ा भाग सेवा क्षेत्र से आता है। चीन के विश्व के निर्माण केंद्र बनने के कारण, भारत के पास कृषि से सीधे सेवा अर्थव्यवस्था में कूदने के सिवाए कोई अन्य विकल्प नहीं है। भारत की स्नातक प्राप्त व्यक्तियों की उच्च संख्या के साथ सॉफ्टवेयर में कौशल इसे विकसित विश्व को सेवा निर्यात करने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाती है।

भारत को तेज़ आर्थिक विकास की ओर कार्य करना चाहिए तथा आर्थिक बढ़त उसका अनुसरण करेगी।